Doctor Bakhsh Aur Qandeel Ka Toota Rishta | Hashim Ki Gandi Niyat Aur Zille Huma Ka Darr | Emotional Urdu Hindi Story ---
डॉक्टर बख्श को बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा था यह सोचकर।
कंदील भी आगा जान के साथ ही मिली हुई थी।
उन्होंने कभी नहीं सोचा था, कि कंदील ऐसा करेगी उनके साथ।
वह तो कंदील की आमद से खुद को सुधारने लगे थे।
पहले से काफी बदल गए थे डॉक्टर बख्श।
कंदील के नजदीक आने से।
लेकिन अब यहां तो सब कुछ उल्टा ही हो गया था।
वह कंदील जिसके आने से, जिसके नजदीक होने से डॉक्टर बख्श ने खुद को पूरी तरह से बदल लिया था।
आज उसने ही ,उनके साथ दगा कर दिया था।
उसने डायवोर्स पेपर्स पर साइन कर दिए थे।
डॉ बख्श से अलग होने के लिए।
डॉ बख्श ने जो कंदील के साथ किया ,उनका जमीर गवारा नहीं दे रहा था, कि वह कंदील के साथ ऐसा करें।
लेकिन उस वक्त डॉक्टर बख्श को गुस्सा आ गया था।
उन्हें गुस्से में कुछ सही गलत नजर नहीं आया।
उन्हें लगा कि इस वक्त कंदील की ईगो को हर्ट करना चाहिए।
उन्हें लग रहा था कि यही ठीक है ,कंदील के साथ उन्हें ऐसा ही करना चाहिए था।
जबकि इस बात से डॉक्टर बख्श भी वाकिफ थे, जो उन्होंने कंदील के साथ किया था ।
वह करना बिल्कुल ठीक नहीं था।
कंदील के जिस्म और ईगो को, दोनों को इस बात से बहुत तकलीफ पहुंचेगी थी।
डॉ बख्श इस बात से भी वाकिफ थे, मगर फिर भी, उन्होंने वह कर दिया जो उन्हें नहीं करना चाहिए था।
कंदील जितनी शिद्दत से मैं तुम्हें चाहा था इसका गवाह अल्लाह है।
लेकिन तुमने कभी मेरी फिलिंग्स को नहीं समझा।
हर वक्त मेरी फीलिंग को तुमने अपने पैरों के तले
ही रोदा है।
डॉ बख्श अपने रूम में अंधेरा किए हुए बैठे थे।
सिगरेट के गश लगा रहे थे।
जब वह बिल्कुल टूट जाते थे, या उन्हें किसी बात का सदमा पहुंचता था।
तो इसी तरह सिगरेट पर सिगरेट पीते थे।
नॉर्मल ही वो सिगरेट को हाथ भी नहीं लगते थे।
उनकी नजर में ये एक बुरी लत थी।
कंदील का खूबसूरत और मासूम चेहरा बार-बार डॉक्टर बख्श की आंखों के सामने लहरा रहा था।
बस अब ,मैं तुम्हारे बारे में कहीं नहीं, कभी नहीं सोचूंगा। तुम्हारा और मेरा साथ यही तक था कंदील जफर।
आगे की लाइफ की तहरीर, मैं बदल दूंगा।
निकाल दूंगा तुम्हें अपनी जिंदगी से कंदील।
वह अपने दिल में यह बात सोच रहे थे।
आज के बाद से जितनी नफरत मैं तुमसे करूंगा, उसकी दुनिया में कोई मिसाल नहीं होगी कंदील।
आई हेट यू कन्दील जफर।
उन्होंने अपना फोन उठाकर।
स्क्रीन पर लगा हुआ कंदील का फोटो, डिलीट कर दिया।
दूर चली जाओ मेरी जिंदगी से कंदील जफर यही तुम चाहती थी
यह मैंने आज कर दिया है।
डॉ बख्श अपने होठों में बड़बड़ा रहे थे।
उन्होंने कंदील की फोटो को डिलीट करके फोन दूर फेंक दिया।
जैसे कन्दील के साथ अब इस फोन से भी कोई मतलब ही ना हो डॉक्टर बख्श को ।
क्या हुआ है सै इस तरह अंधेरा करके क्यों बैठे हो तुम रूम में?
वो कंदील के बारे में सोच रहे थे, जब की उनकी मम्मा ने आकर कमरे की लाइट ऑन कर दी।
और डॉक्टर बख्श से सवाल करने लगी।
कुछ नहीं मम्मा बस ऐसे ही।
उन्होंने खुद को नॉर्मल जाहिर करने की कोशिश की, और मुस्कुरा कर बोले।
नहीं सैफ इस बात से मैं अच्छी तरह से वाकिफ हू, के कभी तुम्हारे साथ अगर कुछ बुरा होता है,या जब तुम्हारी ईगो हर्ट हो जाती है।
उस वक्त तुम खुद को अकेला रखते हो, इसी तरह अंधेरा करके अपने रूम में बैठते हो।
उसकी मम्मा, उनके नजदीक बैठते हुए बोली।
फिटिंग्स के लॉन्ग सूट और ट्राउजर में, आंखों पर आई साइड वाला चश्मा लगाए हुए।
अभी भी इस एज में डॉक्टर बख्श की मम्मा काफी स्मार्ट लग रही थी।
डॉक्टर बॉक्स खामोश रहे ,उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। डॉक्टर बख्श की मम्मा ने पास रखा हुआ फोन अपने हाथ में उठाया।
और फोन को ऑन किया।
लेकिन इस फोन को ऑन करके इस बात से वह बहुत शॉक्ड हो गई थी।
उसके स्क्रीन सेवर पर कंदील की फोटो नहीं थी।
इन 6 साल में पहली बार ऐसा हुआ था, कि डॉक्टर बख्श की स्क्रीन पर कंदील की फोटो हटी हुई थी।
सैफ तुम्हारा फोन ठीक है ना।
उन्होंने डॉक्टर बख्श से सवाल किया।
जी हां मम्मा मेरा फोन ठीक है।
डॉ बख्श ने कहा।
लेकिन मम्मा आप ये सवाल क्यों पूछ रही है?
डॉ बख्श ने कहा।
कुछ नहीं बेटा बस ऐसे ही।
उन्होंने बामुश्किल मुस्कुराने की कोशिश की।
वह इस बात से अच्छी तरह से वाकिफ हो चुकी थी।
की कोई बहुत बड़ी बात हुई है।
जिस डॉक्टर बख्श काफी अपसेट है।
और कंदील का फोटो उनके फोन पर से हटा हुआ है।
टेक केयर योरसेल्फ बेटा।
उन्होंने डॉक्टर बख्श के सर पर हाथ फेरते हुए कहा।
तुम खुद इतने समझदार हो कि मुझे तुम्हें समझाने की कोई जरूरत नहीं है।
मगर एक बात कहना चाहूंगी।
की कुछ रिश्ते जितनी ज्यादा पुराने हो जाते हैं उन्हें संभालने की और समझने की और ज्यादा जरूरत होती है बेटा।
मैं यह चाहती हूं कि अगर तुम्हारे और कंदील के बीच में कोई ऐसी बात हुई है या कोई झगड़ा हुआ है।
तो आपस में बैठकर उसे बात को सॉल्व कर लो।
अपने रिश्ते को खराब करने की कोई जरूरत नहीं है।
वह मुस्कुराकर कहती हुई।
डॉ बख्श के पास से उठ गई थी।
लेकिन डॉक्टर बख्श के पास इस वक्त उनके सवाल का कोई जवाब नहीं था।
डॉ बख्श उनसे क्या बोलते?
वह रिश्ता जो उन्होंने कायम किया था।
जिसकी जबरदस्ती उन्होंने शुरुआत की थी।
वह बनने से पहले ही खत्म हो चुका था।
डॉक्टर बख्श इस वक्त खुद को एक हारा हुआ जुआरी समझ रहे थे।
जो आज अपना सब कुछ हार चुका था।
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हाशिम के रूम से तेजी से चलती हुई, वो अपने क्वार्टर में आकर रुकी थी।
क्वार्टर में आते ही उसने दरवाजा बंद कर लिया।
दरवाजे से टेक लगाकर बहुत तेज तेज हाफने लगी थी।
फिर उसने अपने मुंह पर हाथ रखा ,और हाथ लगाकर रोने लगी थी।
इस वक्त उसका रोने की स्पीड बहुत तेज थी।
अगर वह अपना हाथ अपने मुंह से हटा देती , तो सब लोग उसकी रोने की आवाज को सुनते।
और यही वह नहीं चाहती थी।
क्यों यह शख्स मेरे नजदीक आया था?
क्या करना चाहता था आज वह मेरे साथ?
या अल्लाह जितना दूर भगाने की कोशिश कर रही हूं मैं उस शख्स से।
उतनी वो मेरी नजदीक आ रहा है।
ऐसा क्या करूं मैं?
जो वो मेरे नजदीक ना आए।
जिल्ले हुमा ,हाशिम के मुतालिक ही सोच रही थी।
क्योंकि आज जो हरकत हाशिम ने की थी?
कोई भी सिंपल सी लड़की डर जाती।
हाशिम की उस हरकत से
फिर वो तो मजलूम अदना की मुलाजिमा थी।
उसको तो अपनी जिंदगी जीने में ही डर लगता था।
वह अपनी जिंदगी को डरते डरते जी रही थी।
वह काफी देर अपने मुंह पर हाथ रखकर रोती रही।
उसके तो आंसू पूछने वाला भी कोई नहीं था।
ना वह अपनी वालिदा के सामने रो सकती थी।
एक बेमुह के जानवर जैसी जिंदगी थी उसकी।
जो सब कुछ सहने के बाद भी अपने मुंह से कुछ नहीं कह सकता था।
कब तक मुझे जिंदगी को जीना पड़ेगा? आखिर मौत क्यों नहीं आ जाती मुझे?
जिल्ले हुमा सोच रही थी।
दरवाजे पर दस्तक होने लगी।
जिल्ले हुमा ने अपने दुपट्टे के आंचल से आंखों के आंसू और अपने मुंह को अच्छी तरह से साफ किया।
ताकि दरवाजा खोलने पर उसकी वालिदा को उसका फेस देखकर यह एहसास ना हो जाए, कि जिल्ले हुमा अभी रोई थी।
जिल्ले हुमा ने दरवाजा खोला और सामने अपनी वालिदा को को देखकर मुस्कुराने लगी।
उसकी वालिदा भी उसको देखकर मुस्कुराने लगी।
आज फिर तुम मुझे बिना बताए हवेली से आ गई बेटा। उन्होंने उसकी थोड़ी को छूते हुए कहा।
वह अम्मी जान आप किसी काम में बिजी थी।
मैं अपने काम से फारिग हो चुकी थी।
फिर मैं सीधी अपने क्वार्टर पर ही आ गई।
जिल्ले हुमा ने कहां?
वह अंदर दाखिल हो चुकी थी ,हुमा ने दरवाजे को बंद कर लिया।
और उनके पास आकर खाट पर बैठ गई।
अल्लाह तुम्हारा नसीब अच्छा करे बेटा ,अल्लाह तुम्हें एक चान्द सा दूल्हा अता करे।
वो उसके नरम मुलायम गालों को छूते हुए बोली।
चान्द से दूल्हे लफ्ज पर जिल्ले हुमा के जहन में एकदम हाशिम का ख्याल आ गया था।
दूसरे लम्हे उसने अपने जहन को झटका।
क्योंकि ऐसा होना नामुमकिन सी बात थी?
कहां हाशिम और कहां जिल्ले हुमा?
दोनों में ही जमीन आसमान का फर्क था।
और आज के बाद तो वह हाशिम से बुरी तरह डर गई थी।
अम्मी जान आप हाथ धोकर आ जाइए मै खाना निकाल कर लाती हूं ।
वह अपनी वालिदा से बोली।
और खाना निकालने के लिए किचन मे आ गई।
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रसोई में चूल्हा जलाते हुए भी जिल्ले हुमा के हाथ कांप रहे थे।
डाल उबल रही थी, मगर उसका दिल उससे भी ज्यादा उबल रहा था।
बार-बार हाशिम का चेहरा उसकी आंखों के सामने आ जाता था।
“या अल्लाह… मुझे उस शख्स से बचा लेना…”
वह बुदबुदाई।
उधर हवेली में हाशिम आईने के सामने खड़ा मुस्कुरा रहा था।
उसकी आंखों में अजीब सी जीत की चमक थी।
“अब तो तुम मुझसे बच नहीं पाओगी… जिल्ले हुमा…”
उसने धीमी आवाज़ में कहा।
और दूसरी तरफ, डॉक्टर बख्श की आंखों से पहली बार खामोशी में आंसू बह निकले थे…
(जारी रहेगा…)
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